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कब किसी की हत्या करना अपराध नहीं होता...?

कब किसी की हत्या करना अपराध नहीं होता...?





भारत का कानून या कहें तो संविधान सबको बराबर अधिकार देता है... कानून का पालन करने वालों को भी और पालन करवाने वालों को भी... यानी जनता और पुलिस, दोनों के अपने अपने दायरे हैं... कोई भी अपना दायरा नही तोड़ सकता... अगर कोई अपने दायरे का उल्लंघन करता है तो, कानून की नजर में वो एक क्राइम है... लेकिन कभी कभी... पुलिस और आमजन कानून हाथ में लेने से नहीं चूकते... इसके लिए संविधान में क्या प्रावधान है... इन सबके बावजूद अपनी आत्मरक्षा करने का अधिकार सबको है... आत्मरक्षा में किया गया अपराध क्या सही है...? क्या आत्मरक्षा में पुलिस पर भी हाथ उठाया जा सकता है...? पुलिस को भी क्या आत्म रक्षा का अधिकार है...? उसी पर ये लेख है:-

आप किसी को भी अपनी आत्मरक्षा में कितनी हानि पहुंचा सकते हैं...?

    आत्मरक्षा में कोई भी काम नाप तौल कर नहीं किया जा सकता है, उस समय परिस्थितियां हमारे वश में नहीं होती... आत्म रक्षा में आपकी और आप पर हमला करने वाले दोनों को लगने वाली चोट का कोई अनुमान नहीं लगाया जा सकता... फिर भी अगर हमलावर के पास कोई हथियार या लाठी डंडा है, तो आप अनुमान लगा सकते हैं कि इस हमले में आपको कितनी भी चोट लग सकती है, इसमें आपको जान जाने और  स्थाई रूप से अपंग होने तक का खतरा भी होता है... उसी हिसाब से आप एक्शन ले सकते हैं... मान लीजिए आपको अगला मारना ही चाहता है तो सामने वाले को मारने के अलावा कोई रास्ता ही नहीं है... IPC यानी इंडियन पीनल कोड के सेक्शन 4 में इसी का उल्लेख "साधारण अपवाद" के रूप में किया गया है...
भारतीय दण्ड संहिता यानी IPC की धारा 96 और 100 में ये प्रावधान है कि आत्मरक्षा में की गई हत्या भी अपराध नहीं है, क्योंकि आत्मरक्षा का अधिकार सबको है, अगर जिसपर हमला किया जा रहा था, वो अपना बचाव नहीं करता तो उसकी मौत हो सकती थी... इसलिए आत्मरक्षा में लिया गया एक्शन अपराध की श्रेणी में नहीं आता...!  धारा 103 में अपनी संपत्ति की रक्षा करने में लिया गया एक्शन भी अपराध की श्रेणी में नहीं आता... इसमें आपके साथ लूट, रात के समय घर में चोरी के दौरान भी अगर संपति का मालिक उस लुटेरे या चोर की अपनी संपत्ति के बचाव के दौरान हत्या कर देता है तो भी ये अपराध नहीं है...!
क्या हमलावर के पास भी अपनी आत्मरक्षा का अधिकार होता है...? इसका जवाब है नहीं, हमला करने वाले या लड़ाई की शुरुआत करने वाले के पास सेल्फ डिफेंस यानी आत्मरक्षा का कोई अधिकार नहीं होता...! 
कोई व्यक्ति किसी महिला का बलात्कार करने की कोशिश करे और महिला द्वारा अपनी रक्षा करने के दौरान संबंधित व्यक्ति की जान चली जाए तो भी ये अपराध की श्रेणी में नहीं आता है...! आईपीसी की धारा 106 में कोई भीड़ अगर किसी पर हमला कर रही हो और जिसपर हमला हो रहा हो... भीड़ के पास हथियार हो तो संबंधित व्यक्ति अपनी आत्मरक्षा में उस भीड़ पर गोली चला सकता है और किसी की जान ले सकता है... ये भी अपराध की श्रेणी में नहीं आता है...!

अब बात करते हैं कि पुलिस आप पर बिना किसी कारण के  या गलत फहमी में हमला करे और आपको चोट पहुंचने का खतरा हो तो आपको उपरोक्त बताई गई धाराओं के तहत अपनी आत्मरक्षा करने का अधिकार है...! बिना बात आपके साथ पुलिस भी नही मारपीट नहीं कर सकती...!

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